Parents Worship Day
                   - 14th February

            4.5 Million Children Participating Across The Globe So Far.
Wednesday, October 24, 2018
पूज्य संत श्री आशारामजी बापू का संदेश
भारतभूमि ऋषि-मुनियों, अवतारों की भूमि है । पहले यहाँ लोग आपस में मिलते तो 'राम-राम' कहकर एक-दुसरे का अभिवादन करते थे । दो बार 'राम' कहने के पीछे कितना सुन्दर अर्थ छुपा है की सामनेवाले व्यक्ति तथा मुझमे-दोनों में उसी राम-पारमात्मा, ईश्वर की चेतना है, उसे प्रणाम हो । ऐसी दिव्या भावना को प्रेम कहते हैं ! निर्दोष, निष्कपट,निर्वासनिक स्नेह को प्रेम कहते हैं | इस प्रकार एक दुसरे से मिलने पर भी ईश्वर की याद तजा हो जाती थी, पर आज ऐसी पवित्र भावना तो दूर की बात है, पतन करनेवाले 'आकर्षण' को ही प्रेम मन जाने लगा है |
१४ फरवरी को पश्चिमी देशों में युवक-युवतियां एक-दुसरे को ग्रीटिंग कार्ड्स, फूल आदि देकर 'वेलेंटाइन डे' मानते हैं | यौन-जीवन सम्बन्धी परस्परागत नैतिक मूल्यों का त्याग करने वाले देशों की चारित्रिक सम्पदा नष्ट होने का मुख्या कारण ऐसे 'वेलेंटाइन डे' हैं, जो लोगों को अनैतिक जीवन जीनो को प्रोत्साहित करते हैं | इससे उन देशों का अधः पतन हुआ है | 

इससे जो समस्याएँ पैदा हुईं, उनको मिटने के लिए वहां की सरकारों को स्कूलों में 'केवल संयम' अभियानों पर करोड़ों डाँलर (अरबों रूपये) खर्च करने पर भी सफलता नहीं मिलती | अब यह कुप्रथा पुरे विश्व में पैर जमा रही है| हमें अपने परम्परागत नैतिक मूल्यों की रक्षा करना चाहिए |  इस संदर्भ में विश्व वन्दनीय पूज्य संत श्री आशारामजी बापू ने की है एक नयी पहल - 'मातृ-पितृ पूजन दिवस' |
 वेलेंटाइन डे कैसे शुरू हुआ ?
रोम के रजा क्लाउडियस  ब्रह्मचर्य की महिमा से परिचित रहे होंगे, इसलिए उन्होंने अपने सैनिकों को शादी करने के लिए मन किया था ताकि वे शारीरिक बल और मानसिक दक्षता से युद्ध में विजय प्राप्त कर सकें | सैनिकों को शादी करने के लिए जबरदस्ती मन किया गया था, इसलिए वेलेंटाइन, जो स्वयं ईसाई पादरी होने के कारण ब्रहमचर्य के विरोधी नहीं हो सकते थे, उन्होंने गुप्त ढंग से उनकी शादियाँ करायीं | रजा ने उनको दोषी घोषित किया और उन्हें फासी दे दी गयी  | सन ४९६ से पोप गेलेसियस ने उनकी याद में 'वेलेंटाइन डे' मानना शुरू किया  | 
 'वेलेंटाइन डे' मानाने वाले लोग वेलेंटाइन  का ही अपमान करते हैं क्योंकी वे शादी से पहले ही अपने प्रेमास्पद को वेलेंटाइन कार्ड भेज कर उनसे प्रणय-सम्बन्ध स्थापित करने का प्रयास करते हैं | यदि वेलेंटाइन इससे सहमत होते तो वे शादियाँ करते ही नहीं |
प्रेमदिवस जरूर मनायें लेकिन प्रेमदिवस में संयम और सच्चा विकास लाना चाहिए । युवक-युवती मिलेंगे तो विनाश-दिवस बनेगा । इस दिन बच्चे-बच्चियाँ और युवक-युवतियां अपने माता-पिता का आदर-पूजन करें और उनके सिर पर पुष्प रखें, प्रणाम करें तथा माता-पिता अपनी संतानों को प्रेम करें । संतानें अपने माता-पिता के गले लगें । इससे वास्तविक प्रेम का विकास होगा । बेटे-बेटियाँ माता-पिता में ईश्वरीय अंश देखें और माता-पिता बच्चों में ईश्वरीय अंश देखें । तुम भारत के लाल और भारत की लालियाँ (बेटियाँ) हो । प्रेमदिवस मनाओ, अपने माता-पिता का सम्मान करो और माता-पिता बच्चों को स्नेह करें ।
प्रेम दिवस (वेलेंटाइन डे ) के नाम पे विनाशकारी कामविकार का विकाश हो रहा है, जो आगे चल कर चिडचिडापन,  डिप्रेशन, खोखलापन, जल्दी बुढापा और मौत लानेवाला दिवस साबित होगा । अतः हम सबको  इस अंधपरम्परा से सावधान होना है !

मेरे प्यारे युवक-युवतियो और उनके माता-पिता ! आप दूरदृष्टि के धनी ऋषि-मुनियों की संतान हैं । ‘वेलेन्टाइन डेङ्क के नाम पर बच्चों, युवान-युवतियों के ओज-तेज का नाश हो, ऐसे दिवस का त्याग करके माता-पिता और संतानो ! प्रभु के नाते एक-दूसरे को प्रेम करके अपने दिल के परमेश्वर को छलकने दें । काम-विकार नहीं, रामरस, प्रभुप्रेम, प्रभुरस...
मातृदेवो भव । पितृदेवो भव ।
बालिकादेवो भव । कन्यादेवो भव । पुत्रदेवो भव ।
* माता-पिता का पूजन करने से काम राम में बदलेगा, अहंकार प्रेम में बदलेगा, माता-पिता के आशीर्वाद से बच्चों का मंगल होगा ।
जो राष्ट्रभक्त नागरिक यहराष्ट्रहित का कार्य करके भावी सुदृढ राष्ट्र-निर्माण में साझेदार हो रहे हैं, वे धनभागी हैं और जो होनेवाले हैं उनका भी आवाहन किया जाता है ।